अमरीका से प्रकाशित होने वाली हिन्दी की मसीही पत्रिका


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कैनवास
धारावाहिक उपन्यास। शरोवन।

शशि:
चन्द्रमा को कहते हैं। इस कहानी की नायिका भी है। बहुत चाहते हुये भी कभी भी अपने दिल की हसरतों का इज़हार नहीं कर सकी।
दीपक:
एक दीप भी होता है, और इस मार्मिक कहानी का नायक भी है। एक दीपक बनकर ही जिसने शशि अर्थात चन्द्रमा को प्यार किया। परन्तु उसकी असीम चाहतों का परिणाम? चन्द्रमा की ख़ामोशी से भरी चादंनी ही प्राप्त हो सकी। शशि के लिये जो सदा ही प्रतीक्षा करता रहा, यह जानते हुये भी कि चन्द्रमा तो केवल आकाश का ही होता है। धरती के दीपक का नहीं।
सरिता: एक नदी या दरिया को भी कहते हैं। ऐसी दरिया जिसमें बाढ़ होती है। प्रवाह होता है। किसी को भी अपने अंक में समेट लेने की ताकत होती है। यदि रोष में आ गई तो उसमें चीख़ती चिंघाड़ती लहरें भी होती हैं। सरिता ने भी एक नदी की लहरों के समान ही दीपक को अपने सैलाब में सदा के लिये समेट लेना चाहा था।
आकाश: आसमान के समान ही मूक और शून्य। फिर भी शशि अर्थात चन्द्रमा पर उसका पूरा अधिकार था। शायद इस अधिकार का कारण उसका शशि का देशवासी होना ही था।
बाला:
नादान और भोली भाली, मासूम सी अनजान, बाला है। वयोसंधि की अवस्था में ही वह दीपक को अपने जीवन का देवता समझकर पूजती रही। क्योंकि वह एक बाला ही थी। बाला के समान ही उसका नादान ना-समझ हृदय भी था।
प्यार-मुहब्बत, दूरियां और भटकन, चाहत और नासमझ तथा भावुकता और एहसास जैसे नाज़ुक दौरों से गुज़रती हुई इस दर्दभरी कहानी का वास्तविक परिणाम क्या होता है? आंसुओं जैसी स्याही में डुबो-डुबोकर लिखी हुई मसीही साहित्यकार शरोवन की एक और नई रचना।

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द्वितीय किश्त

तृतीय किश्त

चतुर्थ किश्त
पांचवी किश्त