अमरीका से प्रकाशित होने वाली हिन्दी की मसीही पत्रिका


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शरोवन की कहानियां

ओस की धड़कन. मांझी नैया ढूंढ़े किनारा | मेरे पथ का राही | बिखरी हुई इकाइंया | एक रेखा और | नाले की वेश्या. मुझे रास्ता दिखा के | आखि़री अदालत | ये रास्ते हैं स्वार्थ के | है तेरे साथ |

सूनी सड़क का मोहताज़ | तुम न जाने | बिटिया | मेरे घर का रास्ता | पड़ाव | एक के बाद एक | मैं भूल कर कहीं | अमावस्या | एक बार फिर से | संशय के दायरे | निर्मलधारा | खोये हुये शहर के लोग | नज़र आती नहीं मंजिल | लहरें बुलाती हैं | एंजिल भाग गई | कर्जदार |
अपनों में दोष कहां | निमिता | मांटी मेरे आंगन की | यूं टूटते हैं अंक | हम से क्या भूल हुई | और सूरज डूब गया| दो लफ्ज़ ज्यादा | अबाना | वेश्याओं का पोख़रा | उसकी खुशिया | रेलवे स्टेशन की सीढि़यों से नीचे | झूठी मज़ार के फूल | अपराध बोध | तेरी दहलीज़ तक | फिर वहीं | सेव्ड | स्पोंसर | इस छत के नीचे | यूँ गल रही हैं हसरतें | कभी कुछ तो कहते | तेरे सपनों के महल | भंगिन | निंदियाँ | क्षितिज के उस पार | महुआ | बहुत देर हुई |

तुम चलो मैं घर आती हूं | छब्बीस साल पुराना पेड | ये रास्ते हैं स्वार्थ के | सातवीं डुबकी के बाद |

संशय के दायरे | जेबुन्निशा | तेरे शहर में | गाय मेरी माता है | क्रॉस | सदाबहार के फूल |

महुआ शरोवन

पापा कहां हैं

डाक्टर उषादेवी विजय कोल्हटकर

कोको की कार