पीछे

 

 

ज़ेलदा 'अकेली' के गीत
सलीब
..

ज़िंदगी की एक
ही भूल काफी है,
खुद को उलझाने के लिए.

फरेब की एक चिंगारी ही काफी है,
सदा तक सुलगते रहने के लिए.

चर्च के एक ईंट भर निकालनी होगी,
सारी कलीसिया को तोड़ देने के लिए.

लालच की एक पैनी ही बहुत होगी,
मसीह को फिर से सलीब देने के लिए.