सातवीं डुबकी के बाद
बाइबल की कहानी

 


'चेतना' के अंक जनवरी­मार्च 2012 में उपरोक्त कहानी का प्रहृाम भाग 'अबाना' नाम से पढ़ा हृाा। अपने मालिक एलीशा और यहोवा परमेश्वर से लालच के कारण गेहजी नाम के सेवक ने विश्वासघात किया और बदले में एलीशा के शाप के कारण नामान कोढ़ी का कोढ़ उस पर और उसके परिवार में रहनेवाले उसके तीन पुत्रों पर भी पड़ा। इस कारण गेहजी और उसके तीनों लड़के कोढ़ी होकर शहर के बाहर कोढ़ियों की बस्ती में जाकर रहने लगे हृो ्र क्योंकि इस्राएलियों को नबी मूसा के द्वारा दी गई परमेश्वर की व्यवस्हृाा कोढ़ियों को अपवित्र मानती है। इस प्रकार से कोढ़ी न तो शहर में बस्ती में अन्य लोगों के साहृा रह सकते हैं ्र और ना ही उनको परमेश्वर के मन्दिर में जाने की इजाजत होती है। गेहजी और उसके परिवार के कोढ़ी हो जाने के पश्चात अब देखिये इस कहानी में आगे क्या होता है?

 

अपने सेनापति नामान के कोढ़ के शुद्ध हो जाने के बाद भी अराम के राजा बेन्हदद का मन किसी भी तरह से परिवर्तित न हो सका। उसने अपनी सेना एकत्रित की और फिर एक बार इस्राएल देश पर आक्रमण कर दिया। इस्राएली तो अपने परमेश्वर यहोवा के साये और उसके भय में अरामियों से अपनी रक्षा हेतु युद्ध कर ही रहे हृो। और अरामी उन पर प्रबल नहीं हो पाते हृो ्र क्योंकि जहां एक ओर अरामियों का सेनापति नामान हृाा वहीं इस्राएलियों की सेना का नेतृत्व स्वंय उनका परमेश्वर यहोवा कर रहा हृाा। अरामी जीत भी कैसे सकते हृो। अपनी जीत न होने और बार­बार इस्राएलियों से म्.ात ख़ाते रहने के कारण अराम का राजा जैसे खीज़ गया। उसने नामान को अपने पास बुलाया और उसके आते ही वह उसको गुप्त आदेश देते हुये बोला ्र
"अमुक स्हृाान पर इस बार मेरी छावनी होगी। किसी को कानों­कान आभास भी नहीं होना चाहिये कि हमारी सेना वहां पर है।"
नामान चुपचाप बगैर कुछ भी कहे हुये राजा के सामने से चला गया और उसके कहे अनुसार एक गुप्त स्हृाान में अपनी सेना को एकत्रित होने का प्रबन्ह्या किया। लेकिन यहोवा के भक्त एलीशा को जब अरामियों की यह बात परमेश्वर से मिली तो उसने इस्राएल के राजा के पास कहला भेजा कि ्र
"हे ्र राजा पूरी चौकसी रखना ्र जिस अमुक स्हृाान से तू जानेवाला है ्र उस तरफ से न जाना। वहां पर अराम का राजा अपनी सेना के साहृा तुझे घात करने के लिये छुपा बैठा है।" तब इस्राएल के राजा ने एलीशा की बात मानी और जिस आम्.ाुक स्हृाान की चर्चा करके परमेश्वर के भक्त ने उसे चिताया हृाा ्र वहां से न जाकर अपना मार्ग बदला और अपनी रक्षा की। इस प्रकार एलीशा ने इस्राएल के राजा की एक­दो बार नहीं बरन् बार­बार उसे अरामियों की तलवार से बचाया हृाा। फिर जब इस बार भी इस्राएल का राजा अराम के हाहृों से बच गया तो अराम के राजा का मन भीतर ही भीतर अत्यन्त घबराने लगा। वह घबराया ही नहीं बल्कि मारे झुंझलाहट और अत्यन्त क्रोह्या के कारण उसने अपने मंत्रिमडल को फिर से राज दरबार में उपस्हिृात होने का आदेश दे दिया। तब समूचे मंत्रिमंडल के साहृा उसका सेनापति नामान भी राज दरबार में उपस्हिृात हुआ। अराम का राजा तो क्रोह्या में जैसे जलते हुये अंगारों के ऊपर बैठा हुआ हृाा। अपने समूचे मंत्रिमडल पर वह जैसे पूरे माल­असबाब के साहृा टूट पड़ा। अपनी उबलती हुई कड़क आवाज़ में वह नामान की तरफ आंखें मिलाते हुये बोला ्र
"मुझे अभी और इसी समय ठीक­ठीक मालुम होना चाहिये कि तुम सब में से ऐसा कौन है जो इस्राएल के राजा की ओर का है ्र ताकि उसका अच्छी तरह से इंतजाम किया जा सके। हमारे मह्यय की गुप्त बातें तक इस्राएल के राजा को किस प्रकार से पहुंच जाती हैं?" तब राजा बेन्हदद का ऐसा भारी क्रोह्या देखते हुये उसका वह कर्मचारी जो नामान के साहृा एलीशा के घर पर उस समय गया हृाा ्र जब नामान अपने कोढ़ से मुक्त होना चाहता हृाा ्र और उसने एलीशा के आश्चर्यकर्म देखे हृो कि किस प्रकार यर्दन नदी में सातवीं डुबकी लेने के बाद पानी से बाहर आते ही नामान का शरीर एक नये जन्मे हुये बच्चे के समान उज्जवल हो गया हृााऌ वह राजा से भयभीत होते हुये अपने कांपते हुये शब्दों में बोला ्र
"हे मेरे प्रभु। हे राजा ्र ऐसा तो कदापि नहीं है। हम में से कोई भी अपनी खबर इस्राएल के राजा के पास नहीं पहुंचाया करता है। उसको हमारी सारी खबरें और वे बातें भी जो तू अपनी शयन कोठरी में गुप्त रूप से करता है ्र एलीशा नाम का इस्राएली भविष्यद्वक्ता बताया करता है।"
"?" अपने कर्मचारी की इस ना विश्वास करने वाली बात को सुनकर बेन्हदद विश्वास करते हुुये अचानक ही चुप हो गया। चिन्ता और गहरी सोच के कारण उसके मस्तिष्क पर ऐसे बल पड़ गये ्र जैसे कि किसी ने तेज ह्याारवाले चाकू से वहां गहरा­गहरा काट दिया हो। फिर काफी देर की चुप्पी के बाद वह नामान से बोला ्र
" नामान ॐ मुझे इस बात की परवा नहीं है कि एलीशा के द्वारा तुझको चंगाई दी और तेरा कोढ़ ठीक किया है। वह मनुष्य हमारे शत्रु की ओर का है ्र और उसका जीवित रहना हमारे देश की भलाई के लिये निहायत ही हानिकारक है। जाकर देखो वह कहां पर है। तब मैं उसे पकड़वाकर यहां बुलाऊंगा। मैं जानता हूं कि एक बार एलीशा को पकड़कर यहां लाने के लिये शायद तेरा हाहृा कांप भी जाये ्र सो तू खुद न जाकर अपने दूसरे आदमियों को भेजने का प्रबन्ह्या करना।"
बेन्हदद यह कहकर उठ गया और अपना कीमती झालरों और हीरे मणिकों से दमकता हुआ चोगा संभालता हुआ सबके बीच से चला गया। सब समझ गये हृो कि मंत्रिमंडल की समिति समाप्त हो चुकी है। सो समिति में आये अन्य वरिष्ठ लोगों तहृाा मंत्रियों के साहृा गहरी चिन्ताओं और सोचों के मह्यय सेनापति नामान भी सिर झुकाये हुये वहां से यही सोचता हुआ निकल आया कि ्र क्या वह उस परमेश्वर के भक्त एलीशा पर अपने वे खूनी हाहृा उठा सकेगा जिनको एक दिन उसने ही उन्हें पवित्र किया हृाा। वे ऐसा करे ्र इससे तो बेहतर है कि वह बेन्हदद की नौकरी छोड़कर इस्राएलियों के देश में कहीं जाकर रहने लगे। नामान का इतना सोचना भर हृाा कि ्र उसका दिल दो कश्तियों में पैर रखे हुये किसी मुसाफ़िर के समान अपने ही स्हृाान पर डोलने लगा।
फिर जब बेन्हदद के खोजों ने उसे यह सूचना दी कि एलीशा दोतान में है तो उसने शीघ्र ही वहां पर उसे पकड़ने के लिये घोड़ों और रहृों समेत सैनिकों का एक भारी दल भेज दिया। अराम के राजा के इस दल ने कोई भी देर किये बिना सारे नगर को चारों तरफ से घेर लिया। सुबह को पौ फटते ही जब परमेश्वर के भक्त एलीशा का कोई टहलुआ उठा तो बाहर निकलकर देखते ही आश्चर्य से भर गया—सारे नगर को अरामियों के सैनिकों ने पूरी तरह से घेर लिया हृाा। तब उस टहलुये ने डरते हुये एलीशा को खबर दी। बोला ्र
"हाय ्र मेरे स्वामी गजब हो गया। अब हम क्या करें अरामियों का एक पूरा दल मेरे स्वामी को पकड़ने की मंशा से नगर को घेरे हुये है?"
"बिल्कुल मत डर। क्योंकि जो हमारी ओर हैं ्र वह उनसे भी अह्यिाक हैं ्र जो उनकी ओर हैं।'
यह कहते हुये एलीशा ने यहोवा परमेश्वर से यह प्रार्हृाना की ्र 'हे मेरे परमेश्वर तू अब इसकी आंखें खोल दे ्र ताकि यह भी तेरी महिमा और सेना को देख सके।' तब परमेश्वर ने एलीशा के सेवक की आंखें खोल दीं तो उसने क्या देखा कि ्र उसके मालिक एलीशा के चारों ओर का पहाड़ अग्निमय घोड़ों और रहृों से भरा पड़ा है। यह सब परमेश्वर की महिमा ्र उसकी सेना और शक्ति देखकर एलीशा का सेवक मारे प्रसन्नता में परमेश्वर की स्तुति में जैसे झूमने लगा। पल भर में ही उसका सारा भय अरामियों और उनकी सेना की तरफ से जाता रहा। अभी एलीशा का सेवक परमेश्वर की महिमा को देख ही रहा हृाा कि तभी अरामियों के सैनिक एलीशा की तरफ उसको पकड़ने के लिये आगे बढ़ने लगे तो उन्हें देखकर एलीशा ने परमेश्वर से प्रार्हृाना की ्र ' हे ्र प्रभु इन्हें अन्ह्याा बना दे।' एलीशा का इतना कहना भर हृाा कि अरामियों के सैनिकों के तमाम घोड़े और सवार न दिखने के कारण आपस में ही एक दूसरे से टकराने लगे। इस प्रकार कि पल भर में ही आस­पास का सारा वातावरण उड़ती हुई ह्याूल के कारण ह्याुंह्या से भर गया। एलीशा की प्रार्हृाना के कारण अरामी और उनके साहृा के सभी घोड़े अन्ह्यो हो चुके हृो। फिर जब अरामी मार्ग टटोलते हुये एलीशा के करीब आये तो एलीशा उनसे कहने लगा ्र
"तुम सब किसकी खोज में हो और कहां जाते हो। जहां पर तुम हो ्र वह न तो मार्ग है और ना ही नगर है। तुम लोग जिस मनुष्य की खोज में हो ्र मेरे पीछे चले आओ। मैं तुम्हें उस मनुष्य के पास जिसे ढूंढ़ रहे हो ्र पहुंचाऊंगा।" एलीशा की सलाह पर अरामी सैनिकों का दल उसके पीछे हो लिया। तब एलीशा उन्हें शोमरोन में ले आया। वहां पर आने पर एलीशा ने परमेश्वर से फिर से प्रार्हृाना की ्र ' हे ्र प्रभु अब उनकी आंखें खोल दे ्र ताकि ये सब देखने लगें।' परमेश्वर ने एलीशा की प्रार्हृाना का उत्तर तुरन्त ही दिया। अरामियों की आंखें खुलीं और उन्होंने देखा तो पाया कि वे सब शोमरोन के मह्यय में ्र शत्रुओं की सीमा के अन्दर ्र उनके कब्जे में हैं। अरामियों को अपने अह्यिाकार में पाया देखकर इस्राएल के राजा ने एलीशा से पूछा कि ्र
"हे ्र मेरे पिताॐ क्या मैं इनको मार लूं? मैं उनको मार लूं?" एलीशा ने राजा को उत्तर दिया ्र
"नहीं ्र उन्हें मत मार। क्या तू उनको मार दिया करता है ्र जिन्हें तू तलवार और ह्यानुष से बन्ह्याुआ बना लिया करता है? तू अब उनको अन्न व जल दे ्र कि खा­पीकर ये सब अपने स्वामी के पास चले जायें। तब एलीशा के इस कहृान पर इस्राएल के राजा ने उन सब अरामियों की बड़ी ह्याूमह्यााम से जेवनार की। और जब वे खा­पी चुके ्र तब उसने उन्हें विदा किया। और तब अरामी सैनिक अपने स्वामी राजा के पास चले गये। इतना सब होने के पश्चात फिर कभी अरामियों का कोई भी दल इस्राएल देश की सरहदों के अन्दर नहीं आया।
इस्राएल देश के अभी अरामियों की तरफ से यह मुसीबत टली ही हृाी कि ्र अराम का राजा बेन्हदद जैसे पिछला सब कुछ फिर एक बार भूल गया। उसने कुछ भी सोचे बगैर इस्राएल देश पर चढ़ाई कर दी और उसे चारो तरफ से घेर लिया। इस प्रकार कि शहरपनाह के अन्दर का मनुष्य बाहर नहीं जा सका और बाहर का अन्दर नहीं आ सका। पानी की कमी हुई तो देश में भारी अकाल पड़ गया। देश के पानी के सारे स्त्रोत सूख़ गये। क्या पंछी ्र क्या जानवर और क्या ही मनुष्य सभी सांस लेने वाले जन्तु तक इस भयंकर अकाल की चपेट में आकर हाहाकार करने लगे। अरामी राजा बेन्हदद अपनी सेना के साहृा इस्राएल देश को ऐसा घेरे रहा कि मंहगाई के कारण वहां पर एक गदहे के सिर का दाम चांदी के अस्सी टुकड़ों में और 'कब'ह्यसूख़ा सामान मापने की इकाई ्र लगभग एक क्वार्ट के बराबर। एक चौहृााई कब का माप एक चाय के मह्ययम प्याले के बराबरहृ की चौहृााई भर कबूतर की बीट पांच चांदी के टुकड़े तक में बिकने लगी। तब इन्हीं दिनों में जब एक दिन इस्राएल का राजा शहरपनाह पर टहल रहा हृाा कि तभी एक स्त्री ने उससे गुहार की। वह चिल्लाकर बोली ्र
"हे प्रभु ्र हे राजा मुझे बचा।"
उस स्त्री की आवाज़ सुनकर राजा ने उसे ही डांट दिया। वह बोला कि ्र
"यदि यहोवा तुझे न बचाये ्र तो मैं कहां से तुझे बचाऊं? क्या खलिहान से और क्या दाख़रस के कुंड में से? लेकिन उस स्त्री ने फिर से गुहार की तो राजा उससे बोला कि ्र
"तुझे हो क्या गया है? क्यों चिल्लाती है?" तब राजा के पूछने पर उस स्त्री ने सारी कहानी इस तरह से बयान की। वह अपने साहृा में हृोड़ी दूर पर खड़ी हुई अन्य स्त्री की तरफ इशारा करते हुये बोली ्र
'इस स्त्री ने मुझसे कहा हृाा ्र इस भारी अकाल में तू अपना बेटा दे ्र ताकि हम उसे पकायें और खायें। कल मैं तुझे अपना बेटा पकाने के लिये दूंगी। सो मैंने कल अपना बेटा पकाया और हम दोनों ने उसे खा लिया। लेकिन आज जब मैंने इससे इसका बेटा मांगा तो इसने उसे छुपा लिया है।'
"ॐॐ "
उस स्त्री की दुख और दर्द से भरी सारी दास्तान सुनते ही राजा का मन ऐसा दुखित और टूट गया कि उसने वहीं शहरपनाह पर खड़े हुये पश्चाताप के कारण अपने वस्त्र फाड़ लिये। राजा ने जब ऐसा किया तो वहां खड़े हुये अन्य लोगों ने भी उसे देखा कि वह तो पहले ही से इस अकाल के कारण अपने शरीर पर टाट पहने हुये है। लोग अभी उसको देख ही रहे हृो कि तभी राजा अपने मन में सोचने लगा कि ्र देश पर आई हुई यह सारी विपत्ति और अकाल की महामारी केवल भविष्यद्वक्ता एलीशा के कारण ही है। मन में ऐसा सोचते ही राजा अपनी बुलन्द आवाज़ में लोगों से बोला ्र
"यदि मैं शापात के पुत्र एलीशा का सिर आज उसके ह्याड़ पर रहने दूं तो ्र तो परमेश्वर मेरे साहृा ऐसा ही बरन् इससे भी अह्यिाक करे।"
ऐसा सोचने ही मात्र से राजा यहोराम ने अपने सैनिकों का एक समूचा दल तैयार किया और उनके साहृा खुद भी एलीशा को पकड़कर लाने के लिये साहृा चल दिया। जब राजा के सैनिक एलीशा के नगर में पहुंचे तो उस समय एलीशा अपने घर में बैठा हुआ हृाा ्र और पुरनिये भी उसके साहृा बैठे हुये हृो। सो राजा यहोराम एलीशा के पास आने लगा तो उसे देखते ही एलीशा ने अपने पुरनियों से कहा ्र
"देखो ्र इस खूनी के बेटे ने किसी को मेरा सिर काटने के लिये भेजा है। इसलिये जब उसका दूत यहां पर आये तो घर के किवाड़ बंद करके उसे बाहर ही रोके रहना। क्या तुम सबको उसके स्वामी के पैरों की आहट उसके पीछे नहीं सुनाई पड़ती?"
"?" एलीशा अभी पुरनियों के मह्यय उनसे बातें कर ही रहा हृाा कि तभी राजा का दूत उसके पास आ पहुंचा तो परमेश्वर ने राजा का मन खोल दिया। इस प्रकार कि वह शोमरोन पर आई हुई विपत्ति का कारण ठीक­ठीक समझ गया। वह जान गया कि देश में अकाल पड़ने का सबब एलीशा का शाप न होकर यहोवा परमेश्वर की तरफ से भेजी गई विपत्ति ही है। लेकिन इतना सब कुछ जानने के पश्चात भी राजा यहोराम ने यहोवा की दोहाई न देकर स्वंय यहोवा पर ही दोष लगाया और कहा कि ्र
"्देश पर अकाल की आई हुई विपत्ति तो यहोवा ही की तरफ से है ्र सो आगे को मैं क्यों अब यहोवा की बाट जोहता रहूं?" लेकिन एलीशा ने उसे समझाना चाहा और कहा कि ्र
"अब तुम सब लोग यहोवा का वचन सुनो। यहोवा यों कहता है कि ्र कल इसी समय शोमरोन के फाटक में दो सआ भर मैदा एक शेकेल में और दो सआ भर जौ भी एक ही शेकेल में बिक रहा होगा।"
"?"
पर एलीशा की इस बात को अविश्वास से हवा में उड़ाता हुआ राजा का वह सरदार जिसके हाहृा पर राजा यहोराम अपना तकिया किया करता हृाा ्र बड़ी ज़ोरों के साहृा हंसी का ठहाका लगाता हुआ परमेश्वर के भक्त एलीशा से कहने लगा कि ्र
"सुन ्र चाहे यहोवा आकाश के सारे झरोखे. ही क्यों न खोल दे ्र तौभी क्या ऐसी बात संभव हो सकेगी?"
"ॐ"
एलीशा ने उस सरदार के मुख से परमेश्वर के विरोह्या में जब ऐसी बात सुनी तो वह बड़े ही आश्चर्य के साहृा उस सरदार का चेहरा ताकता रह गया। लेकिन फिर कुछेक क्षणों के पश्चात एलीशा ने उसे चिताया और कहा कि ्र
"सुन ्र तू यहोवा की इस महिमा को अपनी आंखों से तो देखेगा ्र लेकिन उस अन्न में से कुछ भी खाने न पायेगा।"
यों परोक्ष रूप से जब एलीशा ने उस सरदार की दूसरे दिन होने वाली मृत्यु की पूर्व भविष्यवाणी की तो वह सहज ही ख़ीज गया। इस प्रकार कि वह एलीशा को घूरता हुआ कहने लगा कि ्र
"हूंॐ खाने न पायेगा। कल यदि ऐसा न हुआ तो मैं आकर फिर अच्छी तरह से तुझसे बात करूंगा।" रोष में झुंझलाता हुआ वह सरदार बाहर निकल गया तो बाद में राजा यहोराम भी अपने सारे दल के साहृा वापस शोमरोन को लौट गया।
जैसा कि बाइबल के इतिहास में लिखा हुआ है कि ्र जब शोमरोन को अरामी राजा बेन्हदद ने चारो तरफ से घेर लिया हृाा ्र और सारा देश अकाल और पानी की कमी के कारण हाहाकार करने लगा हृाा ्र उस समय चार कोढ़ी शहरपनाह के फाटक के बाहर हृो। ये वही कोढ़ी हृो जिन्हें एलीशा ने नामान का कोढ़ झूठ बोलने और नाफरमानी करने के पाप के कारण दिया हृाा—— अर्हृाात् एलीशा का पूर्व सेवक गेहज़ी और उसके तीन पुत्र। पिता को शाप मिलने के कारण गेहज़ी को कोढ़ उसे तो मिला ही हृाा ्र पर साहृा में उसके वंश को भी मिला हृाा। ह्यगेहज़ी के तीन पुत्रों की बात हमारी बाइबल में नहीं कही गई है ्र पर यहूदी रब्बी परंपरा के अनुसार गेहज़ी के तीन पुत्र हृो। यही तीन पुत्र और गेहज़ी शोमरोन में अकाल के समय शहरपनाह के फाटक के बाहर रहते हृो ्र क्योंकि यहूदी व्यवस्हृाा और नियमों के तहत कोढ़ के रोग से ग्रस्त कोई भी मनुष्य अपवित्र करार दिया जाता हृाा ्र और उसे शहर में आम जनजीवन के साहृा नहीं रहने दिया जाता हृाा। कोढ़ी मनुष्य परमेश्वर के मन्दिर में भी प्रवेश नहीं कर सकता हृाा। इसलिये जब कभी कोई कोढ़ी अपने कोढ़ के रोग से मुक्त हो जाया करता हृाा तो मन्दिर का याजक ही उसे शुद्ध होने का प्रमाण दिया करता हृाा। इसीलिये जब एक बार यीशु मसीह ने किसी कोढ़ी को शुद्ध किया हृाा तो मुक्त होने के बाद उसको याजक को दिखाने की सम्मत्ति दी हृाी ्र और मूसा के द्वारा दी गई व्यवस्हृाा के अनुसार भेंट भी चढ़ाने को कहा हृााह्यलूका 5Á 12­15हृ। यूं गेहज़ी का शाब्दिक अर्हृा 'दर्शन की घाटी ' होता है।हृ
भूख ्र प्यास और अकाल की मार से परेशान होकर गेहज़ी और उसके तीनों पुत्र ्र जो शोमरोन के फाटक के बाहर ्र शहर की बस्ती से अलग रहा करते हृो ्र आपस में कहने लगे कि ्र' हम क्योंकर यहां फाटक के बाहर बैठे­बैठे ्र भूख़ से तड़प­तड़पकर मर जायें। यदि हम नगर के भीतर जाते हैं तो वहां भी पत्हृारवाह करके मारे जायेंगे। दूसरा वहां हमें भोजन तो मिलेगा नहीं ्र क्योंकि वहां तो वैसे भी मरी पड़ी हुई है। और जो हम यहां पर ही बैठे रहें तौभी मर ही जायेगें। तो फिर क्यों न हम अरामियों की सेना में जायें और पकड़े जायें। यदि अरामी हमको जिलायें रखना चाहें तो हम जीवित रहेंगे ्र और यदि वे हमें मार देते हैं ्र तौभी हमें मरना तो यूं भी हैै।'
तब ऐसा विचार करके गेहज़ी और उसके तीनों लड़के सांझ के समय जब सूरज डूबने लगा और दम तोड़ते हुये सूर्य की अंतिम रश्मियां जैतून की पत्तियों से छन­छनकर समाप्त होने लगीं तो सब साहृा होकर छुपते हुये अरामियों की छावनी की ओर चल पड़े। लेकिन जैसा उन्होंने सोच रखा हृाा वैसा कुछ भी ना पाकर कुछ और पाया। अराम की सारी छावनी खाली और सैनिकों की उपस्हिृाति से रिक्त देखकर वे तीनों चौंके ही नहीं बल्कि आश्चर्य से भी भर गये। अरामियों का वहां से दबे पैर भाग जाने का कारण वे यह नहीं समझ पाये कि प्रभु ने अराम की सेना को रहृों और भारी सेना की आहट सुनाई हृाी। जिसे सुनकर अरामी आपस में कहने लगे हृो कि ्र इस्राएल के राजा ने हित्ती और मिस्री राजाओं की सेनाओं को वेतन पर इसलिये बुलाया है कि वे हम अरामियों पर चढ़ाई करें और हमें मार डालें। इसलिये वे सब अरामी सांझ को ही उठकर अपने डेरे ्र घोड़े ्र गदहे ्र और छावनी जैसी की तैसी छोड़­छाड़कर अपना प्राण लेकर भाग गये हृो। तब गेहज़ी और उसके तीनों कोढ़ी पुत्र किसी को भी वहां न पाकर एक डेरे के अन्दर घुस गये और वहां बड़े ही इत्मीनान से बैठकर भोजन खाया और पिया और वहां से सोना­चांदी और वस्त्रों को चुराकर कहीं छिपा दिया। ऐसा ही उन्होंने दूसरे के भीतर घुसकर भी किया। इसके पश्चात जब वे चारों दूसरे डेरों में घुसकर भी वैसा ही करने लगे तो उसी समय गेहज़ी का माहृाा ठनका। वह अपने मन में सोचने लगा कि वर्षों तक उसने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा परमेश्वर के भक्त एलीशा के घर में साहृा­साहृा गुज़ारा हृाा। और वहां रहते हुये एक बार नामान के समय लालच का पाप उसके मन में समाया हृाा। तब उसने साक्षात् एलीशा जो परमेश्वर के सामने खड़ा रहता हृाा ्र को इसी सोने­चांदी और कीमती वस्त्रों के लालच के कारण झूठ बोला हृाा। और तब उसके इस पाप की सजा . . .? नामान का कोढ़ जो उसके गलते हुये शरीर और विकलांग होते हुई हाहृा­पैरों की अंगुलियों के रूप में पल रहा हृाा ्र देखकर ही गेहज़ी का शरीर परमेश्वर के भय में हृार­हृार कांपने लगा। इस प्रकार कि सोने­चांदी के सिक्के और कीमती राजसी वस्त्रों के हृोलै उसके हाहृा से छूटकर स्वतÁ ही नीचे गिर पड़े। तब गेहज़ी का पसीने से तर चेहरा ्र कांपता हुआ शरीर ्र नीचे बिख़रे हुये सोने­चांदी के सिक्के तहृाा वस्त्रों के गिरे हुये ढेर को देखकर ्र उसके तीनों पुत्र एक संशय से अपने पिता की परेशानी को देखते हुये उससे पूछने लगे ्र
" अब्बा ्र आप ठीक तो हैं। ये अचानक से क्या हो गया है आपको?"
"?" तब गेहज़ी तुरन्त ही मुख से तो कुछ नहीं बोला। पर बड़े ही ह्ययान से अपने तीनों पुत्रों का चेहरा बारी­बारी से निहारने लगा। निहारते हुये सोचने लगा कि ्रअपने पिछले एक बार के पाप की सजा तो वह पहले ही अपने पुत्रों को दे चुका है। और अब उसके इस दूसरे पाप का परिणाम . . . .? यह सोचते ही वह तीनों पुत्रों से संबोह्यिात हुआ। बोला ्र
"सुनो ्र जो हम ये सब कर रहे हैं ्र वह अच्छा काम नहीं है। यह तो हम सबके लिये आनन्द का समाचार का दिन है ्र और इसकी खबर हम किसी को भी नहीं दे रहे हैं। यदि हम सुबह की पहली किरण के फूटने तक यहां ठहरे रहें तो हमको इसका दंड मिलेगा। सो आओ हम मिलकर राजा के घराने के पास जाकर इसकी सूचना दे दें।"
"हां ्र यह सब तो ठीक है। लेकिन हम राजा के पास शहर के भीतर जायेंगे किस प्रकार। हम तो कोढ़ी हैं ्र और शहर के अन्दर घुसने की हमको इजाज़त नहीं है।" गेहज़ी के पुत्रों ने अपनी परेशानी बताई तो उसने उन्हें उत्तर दिया। वह उनसे बोला ्र
"इसकी चिन्ता मत करो। हमारा काम राजा को सूचना देना है। शहर में घुसने और राजा के पास तक जाने का प्रबन्ह्या यहोवा परमेश्वर आप ही करेगा।"
तब गेहज़ी की इस सलाह पर उसके तीनों पुत्र तुरन्त तैयार हो गये। लोग उनको यूं सरे­आम घूमते हुये न देख लें ्र इसलिये वे चारो छुपते हुये दूसरे मार्ग से यर्दन नदी को पार करके जाने को तैयार हो गये। फिर काफी देर की पैदल यात्रा के पश्चात जब वे यर्दन नदी को पार करने के लिये उसके अन्दर घुसे तो अचानक ही उनके शरीरों में बिजली सी दौड़ गई। एक परमेश्वरीय शक्ति का आभास जब उन्हें हुआ तो उन्हें लगा कि एक अजीब सी शक्ति का संचार उनके बदनों में हो चुका है। तब इसी जोश और उत्साह में उन चारों ने यर्दन को पार कर लिया। लेकिन जब वे यर्दन नदी को पार करके जैसे ही बाहर आये तो सबके सब अपने शरीरों को देख कर आश्चर्य से गड़ गये—— उनके शरीर किसी नवजात शिशु के समान उज्जवल हो गये हृो। परमेश्वर ने उन चारों को एलीशा के शाप से मुक्त कर दिया हृाा। नामान का कोढ़ उनके शरीरों से उतरकर यर्दन नदी के जल में बहकर समाप्त हो चुका हृाा। ठीक उसी प्रकार ्र जैसे कि एक दिन गेहज़ी ने जिस सोने­चांदी और वस्त्रों के लालच में नामान के कोढ़ को मोल लिया हृाा ्र उसी का दाम उसने उसी सोने­चांदी और वस्त्रों को लौटाकर फेर दिया हृाा। यर्दन के बाहर आकर गेहज़ी ने अपने चारो तरफ देखा। अपने तीनों पुत्रों को फिर से देखा। तब अपने आप ही उसका सिर वहीं अपने परमेश्वर के सिज़दे में झुक गया। साहृा में उसके तीनों पुत्र भी यहोवा परमेश्वर के सम्मान और ह्यान्यवाद में दंडवत् करने लगे। बाद में जब चारो लोग प्रसन्नता और उल्लास में राजा के पास शोमरोन की तरफ जाने लगे तो गेहज़ी ने फिर एक बार यर्दन नदी के जल की चांदनी रात में चमकती लहरों को निहारा——देखते ही उसे याद आया कि यह तो यर्दन नदी की वही जगह है जहां पर एक दिन सात बार डुबकी लेने के पश्चात अराम के सेनापति नामान का कोढ़ सदा के लिये जाता रहा हृाा।
तब गेहज़ी और उसके तीनों पुत्र चले और नगर के चौकीदारों को बताया कि ्र'हम जो अरामियों की छावनी में गये तो देखते हैं कि वहां पर तो कोई भी नहीं है। मनुष्य की भी कोई आहट नहीं है। केवल बंह्यो हुये घोड़े और गदहे हैं। और उनके डेरे भी जैसे के तैसे हैं। तब राजा उसी समय रात को ही उठा और अपने सेना के साहृा अराम की छावनी में गया। सेना ने अरामियों की छावनी को लूट लिया। और तब यहोवा के वचन के कहे अनुसार वहां पर एक सआ मैदा एक शेकेल में और दो सआ जौ एक शेकेल में बिकने लगा। और राजा ने उस सरदार को जिसके हाहृा पर वह तकिया किया करता हृाा ्र शोमरोन के फाटक का अह्यिाकारी ठहराया हृाा। मगर लोगों की भारी भीड़ और जमावड़े के कारण वह वहीं लोगों के पावों से दबकर मर गया। यह सब परमेश्वर के भक्त एलीशा के उस वचन के कारण हुआ जो उसने राजा से उसके ही यहां आने के समय कहा हृाा कि ्र 'कल इसी समय शोमरोन के फाटक में एक सआ मैदा एक शेकेल में ्र और एक सआ जौ एक शेकेल में बिकेगा ्र' वैसा ही हुआ। और उस सरदार ने परमेश्वर के भक्त को उत्तर देकर कहा हृाा कि ्र' सुन ्र चाहे यहोवा आकाश के झरोख़े खोले ्र तौभी क्या ऐसी बात हो सकेगी?' तब परमेश्वर के भक्त ने उससे कहा हृाा ्र सुन ्र तू यह सब अपनी आंखों से तो देखेगा ्र परन्तु उस अन्न में से खाने न पायेगा।' सो उसके साहृा ठीक वैसा ही हुआ। उस सरदार ने अपनी आंखों से देखा तो सब कुछ ्र पर बगैर कुछ भी खाये हुये फाटक में ही लोगों के पैरों से दबकर मर गया।

दूसरे दिन की सुबह में राजा परमेश्वर के भक्त एलीशा के सेवक गेहज़ी से बातें कर रहा हृाा। तब राजा ने गेहज़ी से कहा कि ्र 'मुझे वह सब बातें वर्णन कर जिनमें एलीशा ने बड़े­बड़े काम किये हैं।' तब गेहज़ी ने वे सारे आश्चर्यजनक काम जिनमें शूनेमन के बेटे को भी फिर से जिलाने का कार्य हृाा ्र एक तरफ से राजा से सब बयान कर दिये। राजा ने सुना और प्रसन्न हुआ ्र और फिर यहोवा की तरफ से फिर कभी भी मन नहीं फिराया।

समाप्त.